Friday, 21 March 2014

एक चलती-फिरती लाइब्रेरी का खत्म हो जाना है. खुशवंत सिंह



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एक कहावत है कि दुनिया से किसी बुजुर्ग का उठना असल में एक चलती-फिरती लाइब्रेरी का खत्म हो जाना है. खुशवंत सिंह के निधन की खबर सुन सबसे पहले यही कहावत याद आयी. जवाहरलाल नेहरू अबुल कलाम आजाद के दिमाग को विश्वकोषीय कहते थे और हमारे वक्त में यह बात खुशवंत सिंह पर फिट बैठती है. नये और आजाद भारत के विचार को उन्होंने अपनी आंखों के सामने आकार लेते देखा.
यह एकरंगे नहीं, बल्कि बहुरंगे भारत का विचार था, जिसे साकार करने के लिए वे अपनी लेखनी के सहारे संघर्षरत रहे. उनका जाना, बहुरंगे भारत के विचार के एक दमदार पैरोकार का जाना है. 99 की उम्र पूरा कर विदा हुए खुशवंत सिंह की कलम अखबार के पन्नों पर 70 वर्षो तक अनथक चली. उनकी अविराम लेखनी ने ऐसी आभा अख्तियार कर ली थी कि उसके शाश्वत होने का भ्रम होता था.
इसलिए, जब दो साल पहले एक अंगरेजी पत्रिका ने घोषणा की कि खुशवंत सिंह अब लिखना बंद कर रहे हैं, तो लाखों पाठकों को सहसा यकीन नहीं हुआ. बहरहाल, अपने लेखन में खुद को हमेशा ‘एक शरारती बुजुर्ग’ के रूप में दिखाने के लिए सजग रहनेवाले खुशवंत सिंह ने जब कलम रख देने की घोषणा की तब भी शायद ही कोई कह सका कि वैराग्य की इस वेला में उनका बांकपन चला गया. बांकपन चला गया होता तो खुशवंत सिंह यह न कहते कि लेखनी को विराम देने के बाद मुङो बहुत याद आयेंगे वे रुपये जो मिला करते थे और ‘वे लोग जो अपने बारे में लिखवाने के लिए मेरी चापलूसी किया करते थे.’
पावनता के बीच किसी तुच्छता की यह छौंक या कह लें एक खास किस्म का बांकपन ही उनके पत्रकारीय शब्द-संसार की जान था. छोड़ दें उनके साहित्यकार, इतिहासकार और अनुवादक के रूप को और केंद्रित करें सिर्फ उनके पत्रकारीय कर्म पर, तो दिखेगा कि उनकी ‘शरारत’ व्यवस्था के प्रति असंतोष से उपजी और उसके दोषों को दूर करने के भाव से प्रेरित थी. उन्होंने गुदगुदी देकर चिकोटी काटने की खास शैली विकसित की और अपने लेखन से बड़े-बड़ों को तिलमिलाने पर मजबूर किया. वे ऐसा कर पाये, क्योंकि वे पत्रकार को न तो समाज-सुधारक की भूमिका में देखने के हामी रहे, न ही किसी राजनीतिक पंथ के भक्त या गुरु के रूप में देखने के पैरोकार. source website

Tuesday, 4 March 2014

भारत के प्रमुख उद्योगपति मुकेश अंबानी का लगातार सातवें साल भारत के सबसे अमीर व्यक्ति

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 भारत के प्रमुख उद्योगपति मुकेश अंबानी का लगातार सातवें साल भारत  के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब बरकरार रहा लेकिन दुनियाभर के सबसे अमीर लोगों  में उनका स्थान पिछले आठ साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. फोर्ब्स की अमीरों की ताजातरीन सूची में अंबानी 18.6 अरब डालर की निवल संपत्ति के साथ दुनियाभर के अमीरों की सूची में 40वें स्थान पर रहे लेकिन भारतीय अमीरों में वह पहले नंबर पर बने हुये हैं. वर्ष 2006 में अंबानी दुनिया के अमीरों की सूची में 56वें स्थान पर रहे थे. तब उनकी संपत्ति 8.5 अरब डालर रही थी. यह पहला साल था जब रिलायंस समूह के विभाजन के बाद मुकेश और उनके छोटे भाई अनिल अंबानी की संपत्ति को अलग-अलग दिखाया गया.

मुकेश अंबानी की संपत्ति वर्ष 2008 में 43 अरब डालर तक पहुंच गई थी. तब दुनियाभर के अमीरों में उनका 5वां स्थान था. उसके मुकाबले आज उनकी संपत्ति काफी घटकर 18.6 अरब डालर रह गई. वर्ष 2008 में ही मुकेश अंबानी पहली बार दुनिया के 10 सबसे धनी व्यक्तियों की सूची में शामिल हुये थे और 2011 तक पहले दस में शामिल रहे थे. फोर्ब्स ने कहा ‘‘2008 में 43 अरब डालर की संपत्ति और विश्व के पांचवें सबसे अमीर व्यक्ति रहे मुकेश की संपत्ति में उसके बाद से भारी गिरावट हुई और उसमें सिर्फ पिछले साल ही 2.9 अरब डालर की गिरावट आई.’’ इसके बावजूद फोर्ब्स ने कहा कि मुकेश अंबानी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति हैं और अभी भी आगे बढ़ने की तैयारी में हैं. अंबानी की अगले दो साल में अपने कारोबार में 25 अरब डालर के निवेश की योजना है.

फोर्ब्स ने कहा ‘‘अंबानी रिलायंस इंडस्टरीज के केजी-डी6 तेल क्षेत्र से जुड़े विवादों  को लेकर काफी चर्चा में रहे हैं. गैस के दाम बढ़ने के बाद अब इस क्षेत्र से उन्हें काफी फायदा मिलने वाला है.’’ लक्ष्मी मित्तल की कंपनी आर्सेलरमित्तल पर भी कमजोर मांग और भारी रिण का असर रहा लेकिन वह विश्व की सबसे बड़ी इस्पात निर्माता बनी रही. कंपनी को 2013 में 2.5 अरब डालर का नुकसान जो इसके पिछले साल के मुकाबले कम है. इसका श्रेय खर्च में कटौती से जुड़ी पहलों को जाता है.

फोर्ब्स के मुताबिक अर्थव्यवस्था में नरमी और रुपये में गिरावट से भारतीय अरबपतियों की संपत्ति पर असर हुआ. फोर्ब्स की 2014 की सूची में भारत के 56 अरबपति शामिल हैं जिनकी कुल संपत्ति 191.5 अरब डालर है जो पिछले साल के दर्ज 55 अरबपतियों की कुल संपत्ति 193.6 अरब डालर से कम है. इस साल फोर्ब्स सूची से बाहर निकलने वालों में शशि और रवि रईया प्रमुख रहे जिन्हें डालर के लिहाज से सबसे अधिक 3.6 अरब डालर का नुकसान हुआ क्योंकि लंदन में सूचीबद्ध एस्सार एनर्जी के शेयर लुढ़क गए.

sat charano me hoga chunaw

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आगामी लोकसभा चुनावों के लिए मतदान की तारीख की घोषणा बुधवार को कर दी जाएगी. कल सुबह 10:30 बजे चुनाव आयोग प्रेस कॉफ्रेंस करेगा जिसमें लोकसभा चुनाव की जाएगी. चुनाव अप्रैल के दूसरे सप्ताह (7 से 10 अप्रैल) से मई के बीच होने की संभावना है. चुनाव आयोग ने गरमी की वजह से कार्यक्रम को आगे बढ़ाने या सीमित करने के सुझाव को खारिज कर दिया है. आयोग द्वारा पिछले महीने बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में इस तरह की मांगें उठी थीं.          

सात चरण में पड़ेंग वोटचुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक मतदान शुरू होने की तारीख संभवत: 7 से 10 अप्रैल के बीच हो सकती है. हालांकि चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देने का कार्य जारी है. फिलहाल सात चरणों का विचार है जिसे कम करके छह चरणों तक सीमित करने के प्रयास किये जा रहे हैं. 2009 के लोकसभा चुनाव 16 अप्रैल से 13 मई के बीच पांच चरणों में हुए थे.

प्रथम चरण में नक्सल क्षेत्र
केंद्रीय गृह मंत्रालय, राज्य सरकारों, अर्धसैनिक बलों और राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ विचार -विमर्श पूरा हो चुका है. सूत्रों ने कहा कि बलों के अधिक से अधिक इस्तेमाल की योजना है. पहले चरण में कुछ नक्सल प्रभावित राज्यों और कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में मतदान होने की संभावना है. यहां विस चुनाव भी : आंध्र प्रदेश, ओड़िशा और सिक्किम विधानसभाओं के चुनाव भी होंगे.